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कोरोना के बढ़ते डर से पूरे देश में कामकाज पर बुरा असर

कोरोना के बढ़ते डर से पूरे देश में कामकाज पर बुरा असर

By: Textile World Date: 2021-04-14

अहमदाबाद/ सांवलाराम चौधरी 
पिछले काफी समय से कोरोना के केसों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। देश के 11 राज्यों में स्थिति बहुत ही गंभीर बनी हुई है। कहीं पर आंशिक लॉकडाउन है और कहीं पर पूरे लॉकडाउन की अफवाहों से समस्त देश का माहौल खराब हो चुका है, जिसके कारण व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पूरे देश की व्यापारिक नगरी मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में कोरोना की स्थिति बहुत ही भयावह होती जा रही है। अगर स्थिति नहीं संभली तो महाराष्ट्र में लॉकडाउन होने के पूर्ण आसार नजर आ रहे हैं। होली के त्यौहार में काफी मजदूर वर्ग अपने गांव चले गए थे। वो अब वापस आने से कतरा रहे हैं, इससे उद्योग धंधे प्रभावित हो रहे हैं अब व्यापारियों को रमजान व वैवाहिक सीजन खराब होने का डर सता रहा है। पूरे साल में यही समय होता है, जब व्यापार जोरों पर रहता है। वल्र्ड इकनोमिक फॉरम की रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 तक 10 में से छ: की नौकरी जाने की पूरी संभावना है आने वाले समय में कोरोना नियंत्रण में नहीं आता है, तो वित्तीय स्थिति बहुत ही खराब हो सकती है।
उधर सरकार असम, बंगाल आदि में जंगी चुनावी सभाए कर रही है व बिना मास्क के हजारों में जनता आ रही है, फिर कोरोना को कौन रोक पायेगा। 
मार्च एण्डिंग व अप्रैल में बैंकों में काफी छूट्टियां होने से कामकाज प्रभावित हो रहा है। ग्रे बाजार में तेजी का माहौल थम गया है। व्यापारी नया माल लेने से घबरा रहे हैं कि पहले लॉकडाउन था और अब कुछ प्रतिबंध आ जायेंगे, तो क्या करेंंगे।
बाजार में ग्राहकी का इंतजार है, कामकाज बहुत ही कम मात्रा में हो रहा है। गर्मी का पारा भी बढ़ जाने से दिन में बाजार सुनसान नजर आ रहे हैं। बाहर आने वाले व्यापारी भी आरटीपीसीआर टेस्ट कराने से डर रहे हैं, इसलिए बाहर का कोई भी व्यापारी नहीं आ रहा है।
सरकार द्वारा कोरोना वैक्सीन का प्रबंध सब बाजारों में रखा गया है, उसका व्यापारी लाभ ले रहे हैं। बाजार में पैसों की तंगी बरकरार है। ग्राहकी नहीं चलने से व्यापारी परेशान है। बाजार में गर्मी के कपड़े की मांग चालू है, जिसमें जाय साटन, पीसी, पीवी केम्ब्रिक व प्रिण्ट के मालों में लेवाली बताई जा रही है। कच्चे सूट की डिमांड ज्यादा नहीं है, कुर्ती में भी थोड़ी बहुत ग्राहकी चल रही है। रेयॉन, रेयॉन स्लब, रेयॉन जरी, रेयॉन प्रिण्ट की भी थोड़ी-थोड़ी डिमाण्ड बताई जा रही है। यहां के व्यापार में अब  प्रिंट की भी थोड़ी-थोड़ी डिमांड बताई जा रही है। व्यापार में अब  कोरोना के बाद बहुत ही बदलाव आ गया है, कोई भी व्यापारी ज्यादा समय की उधारी में अपना माल नहीं बेचना चाहता हैं। जो व्यापारी 6 महीने में पेमेंट नहीं मांगते थे, वह भी ज्यादा से ज्यादा 30 दिन की उधारी में ही माल बेच रहे हैं। 
जहां ग्रे बाजार में 5 से 6 महिने की उधारी में माल आता था, वह अभी 15 से 20 दिन का हो गया है। उधर साउथ (इरोड़) का रेयॉन ग्रे का माल एडवान्स पेमेण्ट में आने लगा है। कपड़े का व्यापार अब धीरे-धीरे सुधर रहा है क्योंकि कोई भी व्यापारी ज्यादा दिन की उधारी देने को राजी नहीं है, जिससे व्यापारी सोच समझकर माल बनाते हैं व खरीदी करते हैं। रमजान मास 14 अप्रैल से चालू हो रहा है, जिसमें अच्छी बाकी चलने की आशा है। उधर कलर, केमिकल लाकड़ा और सभी कच्चे माल के भाव अभी से 30 प्रतिशत बढ़ जाने से प्रोसेस हाउस वाले भी डाइंग प्रिंटिंग के भाव बढ़ाने के लिए तैयार बैठे हैं, मगर ग्राहकी नहीं होने से भाव बढ़ाने के सही समय का इंतजार कर रहे हैं। 
 

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